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बड़े बड़े बूबे वाली

बड़े बड़े बूबे वाली, उसने मुझे एक बार देखा..मेरे फेस पर देखते हुए उसने मुझे आवाज़ लगाई…समीर उठ जाओ 5 बज गये हैं…पर में जान बुझ कर गहरी नींद में सोने आक्टिंग करता रहा. मेरी टाँगों के इस तरह हवा में एक दम उठ जाने की वजह से अब मेरी फ्रॉक मेरी टाँगों से उठ कर मेरे पेट तक आन पहुँची.

( पूनम मन में गाली देकर अपने घर में चली गई,,,,, जाते ही वह अपने कपड़े बदल कर खाना खाने बैठ गई उसके बाद थोड़ा बहुत काम कर के अपने कमरे में जाकर सो गई। पर उसके आखरी सवाल - फिर वहाँ गौरव मे कौन जाएगी ? तू ? – से मैं चौंकी ? उसने तो गुस्से मे ही कह दिया था. मगर मुझे कॉलेज के वो दिन याद आ गये जब उसके रोचक अनुभव सुन के मेरा भी कॉल गर्ल बनाने का जी करता था. आज मौका पाते ही वो पुरानी इच्च्छा प्रबल हो उठी, और मैने कह दिया ; हां, मैं जौंगी वहाँ, बस?

मैने अज़ारा हाथ पकड़ कर पानी तरफ खेंचा तो, वो मेरे साथ लग गयी…और सरगोशी से भरी आवाज़ मैं बोली…खाला आ जाएगे… बड़े बड़े बूबे वाली ऐक दिन वो मेरे घर आई थी जब मैं ने उस को पहली बार देखा और देखते ही उस पर मर मिटा और रात को देर तक उस को चोदने की सोचता रहा. कुच्छ दिन ऐसा चलता रहा और काफ़ी दिनो बाद वो दोबारा मेरे घर आई और इस बार मुझ से रहा ना गया और मैं ने उस से कह दिया के आप मुझे बहुत अच्छी लग'ती हैं. मुझे आप से प्यार हो गया है.

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  1. तो मैने पलट कर नजीबा की तरफ देखा….हां बोलो…. मैं नजीबा के चैहरे को देख रहा था…जो उस वक़्त ऐसा लग रहा था… जैसे उसके गालो में खून उतर आया हो…
  2. धीरे – 2 नाज़िया की नाइटी भी उसकी बुन्द से ऊपेर तक चढ़ चुकी थी….और जैसे ही मेने अपने हाथो को उसकी पैंटी के इलास्टिक के अंदर डाल कर उसकी नंगी बूँद के दोनो पार्ट्स को अपने हाथ में लेकर दबाया तो, नाज़िया को झटका सा लगा…वो मुझसे एक दम से अलग हो गयी… ओम शांति शांति शांति
  3. जब विनोद इतना इसरार कर रहा है,तो चलो थोड़ी देर और रुक जाते हैं यासिर ने जब देखा कि विनोद नही मान रहा. तो उस मेरी तरफ देखते हुए कहा. और फिर विनोद के साथ घर के अंदर चल पड़ा. शाम को वह फिर से रोज की ही तरह घर की सफाई कर रही थी,,,, लेकिन आज उसे संध्या चाची नजर नहीं आ रही थी,,,
  4. बड़े बड़े बूबे वाली...नाज़िया: समीर तुम पागल तो नही हो गये….नज़ीबा किया सोचेगे मेरे बारे मैं.. . मैं तो उसके सामने आँख उठाने के काबिल भी नही रहूंगी…. लेकिन चाची मुझे तो बिल्कुल भी नहीं लगी है मैं सोने जा रही हूं आप अकेले ही चली जाओ ऐसा क्यों नहीं करती बाथरूम में ही कर लो,,,,
  5. अहमद: जी शुक्रिया शाह जी…..आज तो आपने इस ग़रीब का दिल ही जीत लिया… अगर कभी भी आपको मेरी ज़रूरत पड़े तो, मुझे याद करना…. ये मेरा फॅमिली बॅकग्राउंड था... अब आते हैं स्टोरी की तरफ जिस ने मेरी लाइफ चेंज कर दी... और एक मासूम सी पठान लड़की क्या से क्या बन गई.

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उहह...हुउऊउ... जब मिसेज़. शाँतिलाल को लगा कि मैं जल्दी होश मे नहीं आने वाला तो उस ने अपने गला को साफ करते हुवे मेरा ध्यान भंग किया, तब मैं ह्ड्बाडा कर इधर उधर देखने लगा.

ये कह कर उसने सेल्फ़ पर पड़ा हुआ मेरा मोबाइल मेरी तरफ बढ़ा दिया…..मेने सवालिया नज़रों से नाज़िया की तरफ देखा……और उसके हाथ से अपना मोबाइल ले लिया… नज़ीबा मेरे लंड की कॅप को अपने होंटो से पूरी ताक़त के साथ दबाते हुए अंदर बाहर कर रही थी....सच कहूँ दोस्तो मेरी तो जान ही निकले जा रही थी....इतना मज़ा आ रहा था कि, क्या बताऊ....नज़ीबा का सर तेज़ी से ऊपेर नीचे हो रहा था....और उतनी ही तेज़ी से मेरे लंड का कॅप नज़ीबा के मुँह के अंदर बाहर हो रहा था.....

बड़े बड़े बूबे वाली,राज और मेरे सेक्स रिलेशन्स चार साल चले, उस के बाद राज की इंजीनियारिग पूरी हो चली थी फिर मेरी भी शादी हो गयी. शादी से पहले मैं ने राज के साथ कॉपर टी निकाल कर सेक्स किया और उस के प्यार को अपने पेट मे ले के पति के घर गयी.

हम दोनो पसीने से तर हो चुके थे और हमारी साँसें तेज़ तेज़ चल रही थीं. दोनों अगल बगल लेट कर अपनी साँसें दुरुस्त करने लगे.

( मनोज की ऐसी बातें सुनकर पूनम थोड़ा सा गुस्सा हो गई और मन ही मन में गुस्सा होते हुए फोन को अपने माथे पे पक कर मनोज से बोली,,, ।)मुंशी प्रेमचंद जी का जीवन परिचय

तुम जाओ यहाँ से मुझे तुमसे कोई बात नही करनी…मैं तुम्हारी कुछ नही लगती ना…फिर मेरी फिकर क्यों कर रहे हो..जाओ यहाँ से…. नाज़िया सुबकते हुए किचन से बाहर निकल कर अपने रूम मे चली गयी… फ़ैज़: अम्मी आप तैयार हो जाओ…..और समीर के साथ चली जाओ…समीर मेरी बाइक पर आपको लेजाएगा…..समीर प्लीज़ यार अम्मी को पास वाले गाओं तक ले जा…वहाँ अम्मी ने कपड़े सिलाने के लिए दिए हुए है….

नहीं नहीं ऐसा मत करना नहीं तो मैं मर जाऊंगा लेकिन वह लोग बहुत ही गंदी बातें करते थे क्या तुम सुन पाओगी,,,।

मैं: यहाँ का लाइट का कनेक्षन कटा हुआ है…..लाइट के बिना ही काम चलाना पड़ेगा..वैसे भी हम लाइट नही जलाएँगे…अगर कोई भूल से भी इधर आ गया तो, रोशनी देख कर उसे शक हो जाएगा….(मैने पहले ही लाइट का मेन स्विच से ऑफ कर दिया था…जो गेट के पास मीटर वाले बॉक्स मे था….),बड़े बड़े बूबे वाली तुम कोठी चले जाओ. तुम्हारी मालकिन यानी मिसेज़ शाँतिलाल को कुच्छ शॉपिंग करनी है. शाम को वहीं से अपने घर चले जाना.

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